नशा

नशा ही नशाहर तरफ…..हम तो नशे में,जूम रहे है।नशा…..अपने जुनून को पाने का।नशा…..अपने मनपसंद क्षेत्र (व्य्वसाय) को पाने का।नशा…..अपने हिसाब से जिंदगी जीने का।नशा…..अपने शौक पूरे करने का।नशा…..अपने जीवन में नया रंग भरने का।नशा…..अपने आप को नया बनाने का।

Suggestion v/s emotionally harassment

If you offer an opinion or a suggestion to someone, but you are not open for rejection means you are trying to impose your suggestion to that person that means you are being narrow-minded, you are lacking broadness that every person has different angles or parameters to carry out activity or having different circumstances and... Continue Reading →

जिया लागे ना (Singer and Lyricist- Harina)

बिन तेरे जिया लागे ना, तुझको ही बस देखा करू, तू ही मेरे आगे, तू ही मेरे पीछे, तू ही तू, हर जगह...। तेरे बिना कुछ भाये ना, तेरे ही गुण गाती रहूं, तेरा जादु ही कुछ एसा है, मदहोश होती रहूं। सजादु तेरा हर सपना, पूरा कर दू, तेरा हर अरमां, कर दू रौशन,... Continue Reading →

चिंता का पहाड

चिंता के विषय पर संस्कृत सुभाषित: चिता चिंता समानाडस्ति बिंदुमात्र विशेषत:।सजीवं दहते चिंता निर्जीवं दहते चिता।।अर्थात्चिता और चिंता समान कही गयी है पर उसमें सिर्फ एक बिंदु का फर्क है, चिता तो मरे हुए इंसान को (निर्जीव) जलाती है पर चिंता जीवित इंसान को ही जलाती है। कबीर दोहा:(१)चिंता से चतुराई घटे,दुःख से घटे शरीर।लोभ... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (नौवा स्वरूप)

दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे सिद्धियां देने वाला स्वरूप है। इसलिए यह नाम सिद्धीदात्री कहलाता है। दुर्गा माता हमे हमारी मेहनत का फल देते है और हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। भक्ति की शक्ति का स्वरूप है, असंभव कार्य को भी संभव बना देने वाला स्वरूप है। सिद्धीदात्री रूप हमें हमारी प्रतिभा को निखारने... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (आठवां स्वरूप)

दुर्गा माता का यह स्वरूप अंत्यंत गौर है, इतने गौर जैसे की शंख या चंद्र इसलिए इस स्वरूप को महागौरी कहा गया है। दुर्गा माता का यह रूप हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए ज्ञान प्रदान करता है। एसी परिस्थितियां आती है जब हमें पूरा बदलाव लाना पड़ता है। सोच को बदलने की... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (सातवां स्वरूप)

काल (समय) का नाश करने वाला स्वरूप। अंधकार रूपी अज्ञान का विनाश करने वाला स्वरूप। असुरी शक्ति का विनाश करने वाला कालरात्रि स्वरूप है। दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे बुरी शक्तियों से बचाती है, हमारा डर दूर करते है और निडर बनाकर रक्षा करते है। हमारे अज्ञान के कारण हमे जो डर लगता है,... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप ( छठा स्वरूप)

कात्याय ऋषि के आश्रम में उनकी बेटी के रूप में दुर्गा माता प्रगट हुए थे इसलिए इनको कात्यायनी कहा जाता है। यह स्वरूप अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप है अर्थात् दुर्गा माता हमे आशीर्वाद प्रदान करते है कि हम हमारी आंतरिक सूझ बूझ ( Intuition capability) से निर्णय लेकर सफलता प्राप्त कर सके। इसी वजह से कभी... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप(पांचवा स्वरूप) (मातृ स्वरूप)

स्कन्ध का मतलब भगवान कार्तिकेय की माता है, इसलिए यह स्वरूप स्कन्ध माता के स्वरुप से कहा जाता है। दुर्गा माता का यह स्वरूप मातृ स्वरूप है, हम सब की माँ है। कला और विज्ञान (Arts and Science) इन्ही से उत्पन्न हुए है। श्री देवी सूक्तम स्त्रोत में माता के इस स्वरुप की झलक: १)... Continue Reading →

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