एक आरजू है

ताजगी भरी आज की सुबह,खुशनुमा भरी आज की सुबह। आज की सुबह कुछ खास है,आज की सुबह कुछ संदेश लाई है। सूर्य की किरणें जैसे दिल के भाव से,ताल से ताल मिलाकर कह रही हो। अब तेरी मेहनत रंग लाएगी,अब तेरी मंज़िल नज़दीक है। तुने जो तप किया था,उस पर विजय पाना नज़दीक है। अंत:…
एक ही रास्ते पर चलते-चलते,हमसफ़र बन गए।जीवन सफर में चलते-चलते,हमनवा बन गए। -हरिणा
परमात्मा से प्रीति होना, उनमें ही खो जाना और जीवन जीना – यही सार है, इस ख़ूबसूरत कविता का।यह कविता प्रेम रस और भक्ति रस से ओतप्रोत है। मैंने जब यह रचना पढ़ी, मुझे बेहद ख़ूबसूरत लगी, जो मैं आप सबके साथ साझा करना चाहती हूँ। कविता: वेणी में तारक-फूल गूंथ,निशि ने मेरा शृंगार किया;राका-शशि…
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥ वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥३॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥४॥ करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥५॥ गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥६॥ गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥७॥ गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥८॥ भावार्थ: (हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपका जाना भी मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।। आपका बोलना मधुर है, आपका चरित्र मधुर हैं,…
જય જય જય ગુરુદેવ!વંદે અત્રિકુમારં ત્રિભુવનભર્તારમ્જનિમૃતિસંસૃતિકાલં તાપત્રયહારમ્. અર્થઃ ગુરુદેવની જય હો,અત્રિના પુત્ર દત્તાત્રેયજીને વંદન, જે ત્રણે લોકના સ્વામી છે.દત્તાત્રેય પ્રભુ લોકોનું મૃત્યુ, સંસાર કાળ અને તકલીફો બધુ જ દૂર કરી દે છે. કરુણાપારાવારં યોગિજનાધારમ્કૃતભવજલનિધિપારં ષડદર્શનસારમ્. અર્થઃ દત્તાત્રેય ગુરુ કરુણાના સાગર છે અને યોગિજનોના આધાર છે.દત્તાત્રેય પ્રભુએ સંસારની તથા સમુદ્રની ઉત્પતિ કરી છે, દત્તાત્રેય પ્રભુ ષડદર્શનનો…
हम जीवन तो जीते है,पर क्या खुलकर जीते है? खुलकर जीना मतलबजीवन को निभा लेना।कोसे बिन जी लेना। कोसते कोसते और रोते रोते जीना नहीं है।पर हंसते-हंसते और जीगर से जीना है। खुलकर जीना मतलबमुश्किलों का सामना करना है,मुश्किलों से डरना नहीं है। खुलकर जीना मतलबहर हालात को स्वीकार करना है,हर हालात से अनुभव पाना…
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