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#चार आश्रम #सनातन धर्म #संस्कृत श्लोक
प्रथमेनार्जिता विद्या द्वितीयेनार्जितं धनं।तृतीयेनार्जितः कीर्तिः (पुण्य कमाना)चतुर्थे किं करिष्यति।। भावार्थ: जिसने भी प्रथम आश्रम (ब्रह्मचर्य) में विद्या अर्जित नहीं की है, द्वितीय आश्रम (गृहस्थ) में धन अर्जित नहीं किया है, तृतीय आश्रम (वानप्रस्थ) में कीर्ति अर्जित नहीं की है (पुण्य नहीं कमाया), वह चतुर्थ आश्रम (संन्यास) में क्या करेगा? सनातन धर्म में कर्त्तव्य पालन के…
कुछ बातें, यूँ ही..!(1) #सच्ची और कड़वी बात #कदम #आंसू
1) क्यों रोता है? क्यों रोता है पगले?रोने से तो सिर्फ़ आंसू मिलेंगे।वह नहीं, जो तुझे चाहिए। 2) कदम चल पड़े चलना उस और अब,जिस और कदम बढ़ रहे हैैं।क्यों रुके अब?जब कदम ही चल पड़े। 3) एक सच्ची और कड़वी बात यह भी..! अगर बच्चा सपना देखता है,उसे साकार करना चाहता है,तो सब आ…
मन
जिसने अपने मन को जीत लिया है, उसे कोई भी हरा नहीं सकता। इसलिए तो कहा जाता है कि “जिसने मन जीता, उसने जग जीता”। कोई भी व्यकित के, बुरे मनसूबे उस व्यकित पर काम नहीं करते, जिसका मन काबू में हो। जो खुद के मन का मालिक है, उसे कोई भी फर्क नहीं पड़ता…
Stand out from the crowd
If they wonder about my decisions,If they ask thousands of questions;So what? They are part of the crowd,I stand out from the crowd;That’s why they wonder. Don’t feel dull by facing it,Followers amaze! A leader doesn’t. Do out of the box,Become a leader. Today they oppose you,One day they will follow you. Trust your gut,Trust…
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग)
(1)गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकार स्तेज उच्यते । अन्धकार निरोधत्वात् गुरुरित्यभिधीयते ॥ भावार्थ : ‘गु’कार याने अंधकार, और ‘रु’कार याने तेज; जो अंधकार का (ज्ञान का प्रकाश देकर) निरोध करता है, वही गुरु कहा जाता है । (2)किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम्।। भावार्थ : बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों…


kya baat…….bahut khub.
Dhanyavad Madhusudan jii😊😊
स्वागत आपका।