#सपना# परिस्थिति
जब तक आप अनुकूल परिस्थितियो की सीमा में ही रहेगे, तब तक आप अपने सपनो को पूरा करने का रास्ता नही ढूंढ सकते।
प्रतिकुल परिस्थितियो को हराकर ही सपनो को जीता जा सकता है।
जब तक आप अनुकूल परिस्थितियो की सीमा में ही रहेगे, तब तक आप अपने सपनो को पूरा करने का रास्ता नही ढूंढ सकते।
प्रतिकुल परिस्थितियो को हराकर ही सपनो को जीता जा सकता है।
(1) हुज़ूर आपने ही तो हम को ठुकरा दिया और अब शिकायतें लेकर फिर रहे है कि हम से दूर क्यों चले गये? (2) करते हो बातचीत, बड़ी सोच वाली और व्यवहार करते हो, छोटी सोच वाला। गर गौर हम फरमाये, तो किस पर…
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हमारा इरादा तो कल भी पाक ही था, आपने ही समझने में बहुत देर लगा दी। हमारी समझदारी को गुस्ताखी मानकर, आपने ही गुस्ताखी कर दी और खामखा हमे बदनाम कर दिया।
तन्हाई को मिटाने के लिए,हम ख्वाहिशें बनाते हैं।पर कई बार एसा भी होता हैकि वो ही ख्वाहिशें हमें और भी तन्हा कर देती हैं।
शिवो भूत्वा शिवं यजेत।अर्थात्शिव बनकर ही शिव की पूजा करें। इसका यह मतलब है कि हर एक जीव शिव का ही अंश है, यह अनुभूति के साथ उनकी पूजा करें। आराधना करें तो शिव में खोकर करें। हम शिव से अलग नहीं है, हम शिव का ही अंश है, यह विचार मात्र से ही भगवान…
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Nycc
On Mon, Sep 9, 2019, 12:50 PM Harina Pandya Blog wrote:
> harinapandya posted: ” जब तक आप अनुकूल परिस्थितियो की सीमा में ही रहेगे, > तब तक आप अपने सपनो को पूरा करने का रास्ता नही ढूंढ सकते। प्रतिकुल > परिस्थितियो को हराकर ही सपनो को जीता जा सकता है। ” >
👌👌👌
Sach kaha
Dhanyavad 😀
सही कहा, हरिना
उद्यमेन हि सिद्धयन्ति कार्याणि न मनोरथै:
नहि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:
धन्यवाद आपका 😀
संस्कृत सुभाषित पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा, मूझे बेहद पसंद है, संस्कृत भाषा में लिखे हुए सुभाषित, मंत्र, स्त्रोत और जीवन की बातें पढ़ना।
☺️🤗