त्रिदेवी की आराधना का पर्व

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।

नवरात्रि का पर्व आया है,
नवदुर्गा शक्ति का पर्व आया है।

भक्ति के रंग में डुबना है,
आध्यात्मिक विकास करना है।

त्रिदेवी की आराधना में खुद को खो देना है,
त्रिदेवी की आराधना से खुद को संवारना है।

खुद के दु:खों से उपर उठना है,
खुद में प्रसन्नता को ढूंढना है।

काली स्वरूप तमस का प्रतीक है,
यह स्वरूप से प्रेरणा लेनी है;

मन से जड़ता दूर करनी है,
मन की कमज़ोरी दूर करनी है,
सकारात्मकता की रौशनी फैलानी है।

लक्ष्मी स्वरूप रजस का प्रतीक है,
यह स्वरूप से सिखना है;

धन को मेहनत से पाना है,
कर्म में सक्रियता व सच्चाई को लाना है,
विचारों में रचनात्मकता को लाना है।

सरस्वती स्वरूप सत्व का प्रतीक है,
यह स्वरूप से सिखना है;

खुद के अज्ञान को दूर करना है,
खुद में निर्मलता व सौम्यता को लाना है,
कला से जीवन को सजाना है।

दुर्गा माता के नव स्वरूप ( पहला स्वरूप)

शैल का अर्थ पर्वत, हिमालय पर्वत की पुत्री यानी देवी पार्वती, शैलपुत्री कहलाती है। दुर्गा माता के पहले स्वरूप ने पहाड़ से जन्म लिया है।

पहले दिन दुर्गा माता के शैलपुत्री स्वरुप की पूजा की जाती है।

आज से शुरू हुए नवरात्रि के उत्सव की आप सभी को शुभकामनाएं।

नवरात्रि मतलब शक्ति की आराधना का पर्व, दुर्गा माता की आराधना का पर्व। दुर्गा माता के नव स्वरूप है, हर दिन अलग अलग स्वरूप का है, मै आप सभी को हर दिन, माता के एक स्वरूप की जानकारी दूंगी।