खुलकर जीने का मतलब

हम जीवन तो जीते है,पर क्या खुलकर जीते है? खुलकर जीना मतलबजीवन को निभा लेना।कोसे बिन जी लेना। कोसते कोसते और रोते रोते जीना नहीं है।पर हंसते-हंसते और जीगर से जीना है। खुलकर जीना मतलबमुश्किलों का सामना करना है,मुश्किलों से डरना नहीं है। खुलकर जीना मतलबहर हालात को स्वीकार करना है,हर हालात से अनुभव पाना... Continue Reading →

ममता के कई रूप #Happy Women’s Day

स्त्री का हर रूप, ममता की मूरत है,बेटी हो या बहन, पत्नी हो या माँ हो,हर रूप ममता से छलकता है। एक बेटी अपने पिता कीहर छोटी-छोटी बात का ख्याल रखती है,ये ममता का ही रूप है। एक लड़की अपने भाई पर,बेशुमार प्यार लुटाती है,ये ममता का ही रूप है। एक स्त्री अपने परिवार कीपूरे... Continue Reading →

गुरु के लिए नया नज़रिया दर्शाती हुई कविता! (दूसरा भाग)

गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग) भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग) ગુરુ એ જ આધાર प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है । मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी... Continue Reading →

स्वास्थ्य- पहली ज़िम्मेदारी

चलो!एक ज़िम्मेदारी,खुद के लिए उठाए। दूसरों की खुशी का,तो ख़्याल रखते हैं। चलो!अब से खुद कीखुशी का भी ख़्याल रखें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए,व्यायाम करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए,ध्यान करें। भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए,सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। सच्ची दौलत और सच्चा सुख,इसी में छिपा है। पहली ज़िम्मेदारी स्वास्थ्य है,यह कभी न भूलें।

ख़ूबसूरत रिश्ता पति-पत्नी का (1)

यह रिश्ता ही कुछ ऐसा है,जिसमें लेने से ज़्यादा,देने में मज़ा मिलता है।यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जिसमें प्यार की कली खिली हो,जिसमें प्यार की महक उठी हो।बस प्यार ही प्यार बेशुमार हो,यह एक रिश्ता पति-पत्नी का है। जैसे बाती बिना दीया अधूरा,वैसे पत्नी बिना पति अधूरा!जैसे चांदनी बिना रात अधूरी,वैसे पति बिना पत्नी... Continue Reading →

भक्ति रस पर कुछ पंक्तियां

हे कान्हा,तेरी भक्ति में ओतप्रोत हो गई हूं। एसा मन होता हैकि मेरे नयनों से,तेरे मनमोहक रूप को निहारती रहूं। एसा मन होता हैकि मेरे कानों से,तेरी बांसुरी की धुन सुनती रहूं। एसा मन होता हैकि मेरी वाणी से,तेरी लीला के बारे में बोलती रहूं। हे मुरलीधर, बस यही प्रार्थना हैकि तेरी भक्ति करने से,... Continue Reading →

मेरा नया आशियाना

दिल,मेरा नया आशियाना!जिसमें मैं रहने लगी हूँ। पहले दिल से बहुत दूर थी,जब अपने ही जज़्बात में उलझ गई थी।अब जाकर दिल सुलझा पाया सब उलझन। दिल से जुड़ने से, खुद से जुड़ी मैं।दिल अब कुछ हांसिल करना नहीं चाहता।दिल तो बस जीना चाहता है,मेरे अपनों के साथ।

સ્મિતની સુંદરતા (मुस्कान की सुंदरता)

લઘુકાવ્ય - 8 એક સ્મિત..મીઠી યાદો માં ખોઈ દે,હતાશા ને ભુલાવી દે;ગુસ્સા ને ઓગાળી દે;મનને આનંદથી ભરી દે;કેટકેટલું કરે,એક સ્મિત.આ જ તો છે,સ્મિતની સુંદરતા. हिन्दी में भाषांतरः मुस्कान की सुंदरता (लघुकाव्य - 8) एक मुस्कान..मीठी यादों में खो देती है,कुंठा दूर कर देती है,गुस्से को पिघला देती है,मन को आनंद से भर देती है।कितना कुछ... Continue Reading →

शिव मेरे शिव (Podcast)

शिव मेरे शिव,आप को सत् सत् वंदन।आप ही भोलेनाथ और आप ही महादेव,आप ही महाकाल और आप ही आदिदेव। रूप अनेक है मेरे शिव के,सौम्य रूप भी आपका,रौद्र रूप भी आपका,नटराज रूप भी आपका। तीन हैं नेत्र शिव के,भस्म है तन पे शिव के,वस्त्र है बाघ खाल का तन पे शिव के,सर्प है गले में... Continue Reading →

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