ज़िंदगी के लम्हे

ज़िंदगी का हर लम्हाउलझनों में ही,क्यों बिताते हो? ज़िंदगी के कुछ लम्हे,ज़िंदगी का आनंद लेने में भी बिताए। ज़िंदगी का हर लम्हाडर में ही,क्यों बिताते

मशरूफ़ थे

मशरूफ़ थे वो,हम को तड़पाने के लिए। मशरूफ़ थे वो,चाल चलने के लिए। मशरूफ़ थे हम,उनकी चाल को जानने में। मशरूफ़ थे हम,उनके बद इरादों

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