Freedom: To ask nothing. To expect nothing. To depend on nothing. Ayn Rand True freedom is always spiritual. It has something to do with your innermost being, which cannot be chained, handcuffed, or put into jail. Rajneesh No man is good enough to govern another man without his consent. Abraham Lincoln Conformity is the jailer... Continue Reading →
Keys to overcoming bondage (बंधन से आज़ादी)
No one outside ourselves can rule us inwardly. When we know this, we become free.Buddha Everyone seeks freedom, whatever puts you in bondage is always energy drainer and in contrast, whatever sets you free is pleasing, acts as an energy refill agent. Here I am talking about some keys or tips to achieve freeness inwardly... Continue Reading →
#Quote #Exploration
(1)The more you explore, the more you learn;The more you learn, the more your life will be beautiful. (2)Feel independence in yourself and feel contentment about yourself and fly with these two wings of Exploration. Fly and experience the beauty of Exploration.
भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग)
भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए। वे कहते थे कि जिस किसी से भी जितना सीखने को मिले, हमें अवश्य ही उन्हें सीखने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए। उनके 24 गुरुओं में वेश्या, बालक, चंद्रमा, कुमारी कन्या, कबूतर, पृथ्वी, सूर्य, वायु, मृग, समुद्र, पतंगा, हाथी, आकाश, जल, मधुमक्खी, मछली, टीटोड़ी पक्षी, अग्नि, सर्प, तीर (बाण)... Continue Reading →
गुरु के लिए नया नज़रिया दर्शाती हुई कविता! (दूसरा भाग)
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग) भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग) ગુરુ એ જ આધાર प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है । मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी... Continue Reading →
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग)
(1)गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकार स्तेज उच्यते । अन्धकार निरोधत्वात् गुरुरित्यभिधीयते ॥ भावार्थ : 'गु'कार याने अंधकार, और 'रु'कार याने तेज; जो अंधकार का (ज्ञान का प्रकाश देकर) निरोध करता है, वही गुरु कहा जाता है । (2)किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम्।। भावार्थ : बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों... Continue Reading →
मधुराष्टकम् (अर्थ सहित)
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥ वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥३॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥४॥ करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥५॥ गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥६॥ गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥७॥ गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥८॥ भावार्थ: (हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपका जाना भी मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।। आपका बोलना मधुर है, आपका चरित्र मधुर हैं,... Continue Reading →
#Quote #Similarities #Differences
Accept and appreciate differences among one another, don't seek similarities only, have an eye to accept differences as well.Our different qualities is an art of God, try to see the beauty in it. It offers us a different perspective on the things around us, enjoy the similarities you share with others but don't criticize the... Continue Reading →
