वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं। प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती।तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी।। पंचमं जगतीख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा।कौमारी सप्तमं प्रोक्ता अष्ठमं ब्रह्मचारिणी।। नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।एकादशं चंद्कांति द्वादशं भुवनेश्वरी।। ब्राह्या: द्वादश नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्तर:।जिह्वाग्रे वसते नित्यं ब्रह्मारूपा सरस्वती।। १२ नाम के अर्थ: १) भारती - वाणी की देवी २) सरस्वती -... Continue Reading →
गुरु के लिए नया नज़रिया दर्शाती हुई कविता! (दूसरा भाग)
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग) भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग) ગુરુ એ જ આધાર प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥भावार्थ :प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है । मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी... Continue Reading →
गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग)
(1)गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकार स्तेज उच्यते । अन्धकार निरोधत्वात् गुरुरित्यभिधीयते ॥ भावार्थ : 'गु'कार याने अंधकार, और 'रु'कार याने तेज; जो अंधकार का (ज्ञान का प्रकाश देकर) निरोध करता है, वही गुरु कहा जाता है । (2)किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम्।। भावार्थ : बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों... Continue Reading →
मधुराष्टकम् (अर्थ सहित)
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥ वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥३॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥४॥ करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥५॥ गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥६॥ गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥७॥ गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥८॥ भावार्थ: (हे कृष्ण!) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी आंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपका जाना भी मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ।।1।। आपका बोलना मधुर है, आपका चरित्र मधुर हैं,... Continue Reading →
International Day of Yoga संस्कृत मंत्र से, योग का महत्व
पतंजलि प्रार्थनायोगेन चित्तस्य पदेन वाचांमलं शरीरस्य च वैद्यकेन ।योऽपाकरोत्तमं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि ॥ हिंदी में अनुवाद:मन की चित्त वृत्तियों को को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद द्वारा शुद्ध करने वाले मुनियों में सर्वश्रेष्ठ महर्षि पतंजलि को में दोनों हाथ जोड़कर नमन करता हूँ।इस श्लोक को योगाभ्यास के शुरू में गाया जाता है।'योग' शब्द संस्कृत से लिया गया है... Continue Reading →
संस्कृत सुभाषित अर्थ सहित (2)
(1)श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन, दानेन पार्णिन तु कंकणेन।विभाति काय: करूणापराणा, परोपकारैन तु चंदननेन।। अर्थात् कानों की शोभा कुंडलो से नहीं अपितु ज्ञान की बातें सुनने से होती है, हाथ दान करने से सुशोभित होते हैं न कि कंकणो से, दयालु और सज्जन व्यक्तियों का शरीर चंदन से नहीं बल्कि दूसरों का हित करने से शोभा... Continue Reading →
उपनिषद वचन
"अन्नं ब्रह्म।" यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड( Food is God)] पर इतने महत वचनों के सीधे सीधे शाब्दिक अनुवाद नहीं होते, एसे वचनों को समझना पड़ता है, गहराई के भाव को जानना पड़ता है। "अन्नं ब्रह्म" का... Continue Reading →
#संस्कृत #योग / SANSKRIT QUOTES WITH MEANING (3)
योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः । Translation:yogaścittavṛttinirodhaḥ । English Translation:Yoga is restraining the mind-stuff (Chitta) from taking various forms (Vrittis). हिंदी अनुवाद:चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है । source: resanskrit.com ( patanjali"s yoga sutra) Buy Now: Jivan Ke ShabdAmazon Link: Jivan Ke Shabd
संस्कृत श्लोक अर्थ सहित- (2) / SANSKRIT QUOTES WITH MEANING
1. एतदपि गमिष्यति। Translation in Englishaetahdapi gamishyati।This too shall pass.हिंदी में अर्थयह भी गुज़र जाएगा। 2. भूतकाल, वर्तमान और भविष्य काल के लिए (For past, present and future tense) नातिक्रान्तानि शोचेत प्रस्तुतान्यनागतानि चित्यानि । Translation in Englishnātikrāntāni śoceta prastutānyanāgatāni cityāni ।One should not regret what is past. One should only think of the present and future.... Continue Reading →
