जीवन के तराजू में खुशी और गम, दोनो का पलड़ा, कोई एक तरफ ही नही जूकेगा, संतुलन बना ही रहेगा। आप पर खुशीयों की बारिश हो रही हो,तो भी अपने पैर जमी पर ही रखना। आप पर गम की बारिश हो रही हो,तो भी अपने दिल को तूटने मत देना। जीवन का सही मायने में... Continue Reading →
जीत और हार
हार की घनघोर रैना ढल ही जाएगी,जीत हांसिल कर ले तू।फिर तेरी जीत के सबेरे में,रैना ढल ही जाएगी। सफलता पाने के लिए, कई बार हार का सामना पहले करना पड़ता है, उस हार का सामना करने से ही फिर जीत मिलती है। मैंने पहले एक हस्तचित्र (illustration) के स्वरूप में, सफलता मिलने से पहले... Continue Reading →
संस्कृत मंत्र (ध्यान के लिए)/ Sanskrit Mantra (For Meditation)
पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदचयते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।। अर्थात वह पूर्ण है, यह पूर्ण है, परिपूर्णता से ही पूर्णता आती है।पूर्णता से ही पूर्णता प्राप्त करो, पूर्णता प्राप्त करनी है, यही स्मरण में रखना है। विस्तार से वर्णन: वह परमेश्वर पूर्ण है और हम वह परमेश्वर के अंश है तो हम भी पूर्ण ही है क्योंकि पूर्णता... Continue Reading →
नवधा भक्ति
सनातन धर्म में भक्ति के ९ प्रकार दिये हैं, जो नवधा भक्ति कही जाती है। पढीए और सोचिए.. आप कौन से प्रकार की भक्ति करते है? १) श्रवण - भगवान की कथा, ग्रंथ, लीला आदि सुनना। २) कीर्तन - भगवान के स्तोत्र, गुणों, भजन का कीर्तन करना। ३) स्मरण - भगवान को स्मरण करना, उनकी... Continue Reading →
नये साल की शुभकामनाएं
जीवन में कोई एक ही रंग नहीं है, अलग अलग कई रंग हैं, जिससे हमारी दुनिया खूबसूरत रहती है। तंदुरुस्त सेहत, खुशी, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि ,सपने देखना और साकार करना, निराशा-जनक परिस्थिति में हिंमत और हौसलें का रंग और जीवन की गति में प्रगति का रंग। नया साल, आपके जीवन में ये सारे रंग भर... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप (नौवा स्वरूप)
दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे सिद्धियां देने वाला स्वरूप है। इसलिए यह नाम सिद्धीदात्री कहलाता है। दुर्गा माता हमे हमारी मेहनत का फल देते है और हमारी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। भक्ति की शक्ति का स्वरूप है, असंभव कार्य को भी संभव बना देने वाला स्वरूप है। सिद्धीदात्री रूप हमें हमारी प्रतिभा को निखारने... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप (आठवां स्वरूप)
दुर्गा माता का यह स्वरूप अंत्यंत गौर है, इतने गौर जैसे की शंख या चंद्र इसलिए इस स्वरूप को महागौरी कहा गया है। दुर्गा माता का यह रूप हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए ज्ञान प्रदान करता है। एसी परिस्थितियां आती है जब हमें पूरा बदलाव लाना पड़ता है। सोच को बदलने की... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप (सातवां स्वरूप)
काल (समय) का नाश करने वाला स्वरूप। अंधकार रूपी अज्ञान का विनाश करने वाला स्वरूप। असुरी शक्ति का विनाश करने वाला कालरात्रि स्वरूप है। दुर्गा माता का यह स्वरूप हमे बुरी शक्तियों से बचाती है, हमारा डर दूर करते है और निडर बनाकर रक्षा करते है। हमारे अज्ञान के कारण हमे जो डर लगता है,... Continue Reading →
दुर्गा माता के नव स्वरूप ( छठा स्वरूप)
कात्याय ऋषि के आश्रम में उनकी बेटी के रूप में दुर्गा माता प्रगट हुए थे इसलिए इनको कात्यायनी कहा जाता है। यह स्वरूप अंतरज्ञान चेतना का स्वरूप है अर्थात् दुर्गा माता हमे आशीर्वाद प्रदान करते है कि हम हमारी आंतरिक सूझ बूझ ( Intuition capability) से निर्णय लेकर सफलता प्राप्त कर सके। इसी वजह से कभी... Continue Reading →
