संतुलन

“स्वतंत्रता मनुष्य की परम इच्छा है, स्वतंत्रता में ही मनुष्य खिल सकता है, ध्यान करने से स्वतंत्रता पाएंगे। स्वतंत्रता को तुम्हारा केन्द्र और प्रेम को तुम्हारी परिधि बन जाने दो और तुम एक संपूर्ण अस्तित्व हो जाओगे।” ओशो
હનુમાનજી:- જેમણે ભારતીય મહાકાવ્ય રામાયણમાં સૌથી મહત્વપૂર્ણ ભૂમિકા ભજવેલી છે. જે શિવ ભગવાનનો અવતાર છે અને શ્રીરામના પરમ સેવક અને ભક્ત છે. જે તાકાત અને બુદ્ધિના સાગર છે. જે અષ્ટ સિદ્ધિ અને નવ નિધિના દાતા છે. જે દરેક યુગમાં હાજરાહજૂર છે, અમર છે. ૧) હનુમાનજી – જેમના જડબા તુટેલા છે હનુમાનજીના જડબા (સંસ્કૃતમાં હનુ) ઈન્દ્રના…
है इश्क में डूबे से हम,बने है जब से हमसफ़र हम। मैं छलकती हूँ,शब्दों से।वो छलकता है,खामोशियों से। मुझे अच्छा लगता है,उसकी ख़ामोशी की गहराई में डूबना।उसे अच्छा लगता है,मेरे शब्दों की चंचलता में डूबना। है इश्क में डूबे से हम,बने है जब से हमसफ़र हम।
ज़िंदगी ने हमें, सब कुछ दिया,बेहतर ज़िंदगी के लिए, सब कुछ दिया। पेड़-पौधें, ज़मीन, पानी, हवाप्रकृति देकर एहसान किया। पर हम नासमझ है,प्रकृति को प्रदूषित कर दिया। लालच बढ़ाते गये,और प्रकृति को बिगाड़ते गये। प्रकृति को बिगाड़ते बिगाड़ते,जब ज़िंदगी बदतर होने लगी तब जाकर प्रकृति कीक़ीमत होने लगी। क़ीमत भी तब हुई,जब ज़िंदगी के लिएजूझ…
जैसे फूलों की महकमन को प्रसन्न करती है,वैसे अपने सेवाभावी कार्यो की महक सेदूसरों के मन को प्रसन्नता दे।
અંતર માં સુગંધ પ્રસરી છે,પ્રસન્નતા ની આજે!જાણે કે પરમ આનંદ નાં,પુષ્પો ખીલ્યાં છે આજે! हिंदी में अनुवाद अंतर महक उठा है,प्रसन्नता से आज!जैसे कि परम आनंद के फूल खिले हो आज!
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