विचारों की माला- (हास्य रस) (शरारत भरे अंदाज़) खतरों के खिलाड़ी

हम ख़तरों के खिलाड़ी नहीं है,
हम तो खुद एक ख़तरा है।
जो हम से खेलता है,
जो हमको निभा पाता है,
वो खुद एक खिलाड़ी बन जाता है।

😁😄😅😃

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