हाइकु काव्य रचना (5)
प्रेम में ही है,
छिपी जीवन डोर,
न तोड उसे।
प्रेम में ही है,
छिपी जीवन डोर,
न तोड उसे।
લઘુકાવ્ય – 8 એક સ્મિત..મીઠી યાદો માં ખોઈ દે,હતાશા ને ભુલાવી દે;ગુસ્સા ને ઓગાળી દે;મનને આનંદથી ભરી દે;કેટકેટલું કરે,એક સ્મિત.આ જ તો છે,સ્મિતની સુંદરતા. हिन्दी में भाषांतरः मुस्कान की सुंदरता (लघुकाव्य – 8) एक मुस्कान..मीठी यादों में खो देती है,कुंठा दूर कर देती है,गुस्से को पिघला देती है,मन को आनंद से भर देती है।कितना कुछ…
घर… घर जैसे सूरज की रौशनी जैसे सूरज के बिना हमारी दुनिया नहीं चलती, वैसे घर के बिना हमारी दुनिया नहीं चलती। घर तो जैसे, धूप में छांव है। डूबते को सहारा है। चैन से बैठना, चैन से सोना, चैन से सांस लेना, चैन से जीना। घर से ही तो नसीब में होता है। घर…
चलो छोड़ो, जाने भी दोहमारे मन से, कुछ बातों को। कब तक याद करते रहेंगे,चोट पहुंची हुई यादों को? बुरा वक्त था, चला गयापतझड़ का मौसम था, चला गया। चलो छोड़ो, जाने भी दोहमारे मन से, कुछ बातों को।
बनके तितली उड़ गई मैं, ये जहां से उड़ गई मैं। उड़ते उड़ते चली गई कही दूर मैं, दूसरे जहां में पहुंच गई मैं। वहा एक प्यारा सा घर मिला मुझे, और प्यारे से लोग मिलें। सब के दिलों में ना दिवारें थी, ना दुरियां थी, दिया जलता था तो बस प्यार की ज्योतका। मेघधनुष…
चलते रहिए, चलते रहिएसारी उलझनों के साथ,चलते रहिए। करते रहिए, करते रहिएअपने कार्य (कर्तव्य) करते रहिए।चलते रहिए। उलझनें तो जीवन का हिस्सा है,उलझनों के साथ चलना,सीखते रहिए। उलझनें तो जीवन में अवसर है,हमारी प्रगति का अवसर,चलते रहिए। रुकिए मत, रुकिए मतगर उलझनों का सैलाब भी आ जाए,चलते रहिए। चलते चलते, धीरे धीरेसारी उलझन, सुलझन में बदल…
चलो!एक ज़िम्मेदारी,खुद के लिए उठाए। दूसरों की खुशी का,तो ख़्याल रखते हैं। चलो!अब से खुद कीखुशी का भी ख़्याल रखें। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए,व्यायाम करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए,ध्यान करें। भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए,सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। सच्ची दौलत और सच्चा सुख,इसी में छिपा है। पहली ज़िम्मेदारी स्वास्थ्य है,यह कभी न भूलें।
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अति सुन्दर
धन्यवाद 😊