सुहाना सफ़र

चलते चलते कितना सुहाना सफ़र हो गया,हर मेरी जरूरतों को तुमने बिना कहे पूरा किया। मेरे हर कार्य को तुमने आसान किया,मेरे हर जज़्बात को तुमने समझा। हर मुश्किल का एक साथ मिलकर सामना किया,हर धूप छांव में एक-दुसरे का साथ निभाया। मुश्किल हालातों में एक-दुसरे का हौसला बढ़ाया,मुश्किल हालातों को हंसते- हंसते निभाया। पति-पत्नी... Continue Reading →

मेरी माँ

क्या कहूं मैं, कैसी है मेरी माँ?सब से निराली है, मेरी माँ। चेहरे पर हंसी, दिल में परोपकार का भावस्वभाव एसा कि हमेशा लोगों को ठंडक दे। मेरी माँ निर्मल मन की मूरत है,मेरी माँ निश्छल मन की मूरत है। मुझ से ही उसकी पूरी दुनिया है,मुझ से ही उसकी सारी खुशियां है। शांत मिज़ाज... Continue Reading →

Website Powered by WordPress.com.

Up ↑