संस्कृत श्लोक अर्थ सहित (4) #नवरात्री #दुर्गा #सिद्धीदात्री

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ।। अर्थात्: आप सभी कार्यों में मंगल प्रदान करनेवाली हो, भक्त का कल्याण करने वाली हो, सभी पुरुषार्थ ( धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को साधने वाली हो, भक्त को शरण देने वाली गौरी हो। तीन नेत्रों वाली, हे नारायणी! आप को हम नमन करते हैं। दुर्गा का नौवा स्वरूप सिद्धीदात्री है। हमें सभी... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (आठवां स्वरूप)

दुर्गा माता का यह स्वरूप अंत्यंत गौर है, इतने गौर जैसे की शंख या चंद्र, इसलिए इस स्वरूप को महागौरी कहा गया है। दुर्गा माता का यह रूप, हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए ज्ञान प्रदान करता है, एसी परिस्थितियां आती है, जब हमें पूरा बदलाव लाना पड़ता है, सोच को बदलने की... Continue Reading →

दुर्गा माता के नव स्वरूप (तीसरा स्वरूप) (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप)

दुर्गा माता का यह स्वरूप सुंदरता का स्वरूप और निर्भयता का स्वरूप है। माता के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है, इसलिए इनको चंद्रघंटा कहा जाता है। चंद्र को सुंदरता प्रतिक कहा जाता है और दुर्गा माता का यह रूप सोना जैसे एकदम चमकीला होता है, वैसा ही चमकीला है, इसलिए यह... Continue Reading →

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