चिंता का पहाड
चिंता के विषय पर संस्कृत सुभाषित: चिता चिंता समानाडस्ति बिंदुमात्र विशेषत:।सजीवं दहते चिंता निर्जीवं दहते चिता।।अर्थात्चिता और चिंता समान कही गयी है पर उसमें सिर्फ एक बिंदु का फर्क है, चिता तो मरे हुए इंसान को (निर्जीव) जलाती है पर चिंता जीवित इंसान को ही जलाती है। कबीर दोहा:(१)चिंता से चतुराई घटे,दुःख से घटे शरीर।लोभ…
