जो आरजू थी मेरी,उसको पा लिया। पाने के बाद की,पहली सुबह आई। तो कुछ एसाहाल हुआ हमारा। नयी किरण लेकर,नयी सुबह आई। कैसा है खिला नया जहां,जिसमें है नूर नया। जुमु मै, नाचु मै, गाउ मै,खिलखिलाती जाउ मै। नया दौर है ये,जिसमे है नयी सुबह।
शब्द अलग, पर अर्थ समान
अल्लाह की इबादत होती है,भगवान की प्रार्थना होती है। शब्द अलग-अलग हैं,पर अर्थ समान है। तो शब्दों की भिन्नता,शब्दों तक ही सीमित ना रहकर,क्यों भावनाओं तक पहुंच गई है?
बारिश जब भी आती है
बारिश जब भी आती है,तो मेरा मन भी भीगा जाती है। बारिश की बूंदों की आवाज़कुछ और भी दे जाती है।ताल दे जाती है,ताल मेरे मन को प्रकृति में खो जाने की। बारिश की बूंदों की आवाज़कुछ और भी दे जाती है।आहट दे जाती है,आहट मेरे सपने पूरे होने की। बारिश जब भी आती है,तो... Continue Reading →
जीत और हार
हार की घनघोर रैना ढल ही जाएगी,जीत हांसिल कर ले तू।फिर तेरी जीत के सबेरे में,रैना ढल ही जाएगी। सफलता पाने के लिए, कई बार हार का सामना पहले करना पड़ता है, उस हार का सामना करने से ही फिर जीत मिलती है। मैंने पहले एक हस्तचित्र (illustration) के स्वरूप में, सफलता मिलने से पहले... Continue Reading →
नशा
नशा ही नशाहर तरफ…..हम तो नशे में,जूम रहे है।नशा…..अपने जुनून को पाने का।नशा…..अपने मनपसंद क्षेत्र (व्य्वसाय) को पाने का।नशा…..अपने हिसाब से जिंदगी जीने का।नशा…..अपने शौक पूरे करने का।नशा…..अपने जीवन में नया रंग भरने का।नशा…..अपने आप को नया बनाने का।
संस्कृत मंत्र (ध्यान के लिए)/ Sanskrit Mantra (For Meditation)
पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदचयते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।। अर्थात वह पूर्ण है, यह पूर्ण है, परिपूर्णता से ही पूर्णता आती है।पूर्णता से ही पूर्णता प्राप्त करो, पूर्णता प्राप्त करनी है, यही स्मरण में रखना है। विस्तार से वर्णन: वह परमेश्वर पूर्ण है और हम वह परमेश्वर के अंश है तो हम भी पूर्ण ही है क्योंकि पूर्णता... Continue Reading →
नवधा भक्ति
सनातन धर्म में भक्ति के ९ प्रकार दिये हैं, जो नवधा भक्ति कही जाती है। पढीए और सोचिए.. आप कौन से प्रकार की भक्ति करते है? १) श्रवण - भगवान की कथा, ग्रंथ, लीला आदि सुनना। २) कीर्तन - भगवान के स्तोत्र, गुणों, भजन का कीर्तन करना। ३) स्मरण - भगवान को स्मरण करना, उनकी... Continue Reading →
विचारो की माला
तेरे कदम रूक गये अगर,तो मैं चल पडूंगी,पर तेरा कारवां रूकने ना दूंगी।
વિચાર મણકા (ધૈર્યની પરીક્ષા)/ (धैर्य की परीक्षा)
તમારા સ્વભાવ માં ધૈર્ય (ધીરજ) છે કે નહી, તેની સાચી પરીક્ષા ત્યારે જ થાય છે જ્યારે તમારી સાથે વાતચીત માં કોઈ વિવેક રાખે નહી, ત્યારે તમારી પ્રતિક્રિયા થી તમારા સ્વભાવ ની ઓળખ ઉભી થાય છે.हिंदी में अनुवादविचारो की माला- धैर्य की परीक्षाआपके स्वभाव में धैर्य ( धीरज) है या नहीं, उसकी सच्ची परीक्षा तब होती... Continue Reading →
