विचारो की माला – तन्हाई
तन्हाई को मिटाने के लिए,
हम ख्वाहिशें बनाते हैं।
पर कई बार एसा भी होता है
कि वो ही ख्वाहिशें हमें और भी
तन्हा कर देती हैं।
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तन्हाई को मिटाने के लिए,
हम ख्वाहिशें बनाते हैं।
पर कई बार एसा भी होता है
कि वो ही ख्वाहिशें हमें और भी
तन्हा कर देती हैं।
मेरे दिल के पन्ने खूबसूरत यादों से भरे हैं।
लोग जिस राह पर चलाना चाहते हैं, उस राह पर ज़बरदस्ती से चलकर हम बेरंग हो जाते है पर खुद की इच्छाओं को जानकर, खुद के रंगों को जानकर, राह चुनेंगे तो ज़िंदगी में खूबसूरती का रंग होगा। दुनिया की शक्ल में ढलकर बेरंग नहीं होना है,पर खुद के अंदाज़ में रहकर खुद के रंग…
हमारा इरादा तो कल भी पाक ही था, आपने ही समझने में बहुत देर लगा दी। हमारी समझदारी को गुस्ताखी मानकर, आपने ही गुस्ताखी कर दी और खामखा हमे बदनाम कर दिया।
“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड( Food is God)] पर इतने महत वचनों के सीधे सीधे शाब्दिक अनुवाद नहीं होते, एसे वचनों को समझना पड़ता है, गहराई के भाव को जानना पड़ता है। “अन्नं ब्रह्म” का…
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True
☺️
Very True 👍
☺️
वो ही ख्वाहिशें हमे और भी
तन्हा कर देती है।
Absolutely correct.
In sentence me mithai ki madakta h.
👍
Hmm.. reality of life..!