उपनिषद वचन

“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड( Food is God)] पर इतने महत वचनों के सीधे सीधे शाब्दिक अनुवाद नहीं होते, एसे वचनों को समझना पड़ता है, गहराई के भाव को जानना पड़ता है। “अन्नं ब्रह्म” का... Continue Reading →

संस्कृत गीत (जीवन का गीत)

संस्कृत गीत का हिंदी में भाषांतर भी दिया हुआ है। गीत के रचनाकार स्व. पद्मश्री डॉ. श्रीधर भास्कर वर्णेकर जी है। गीत: मनसा सततं स्मरणीयम्वचसा सततं वदनीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ लोकहितं॥ न भोगभवने रमणीयम्न च सुखशयने शयनीयनम्अहर्निशं जागरणीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ मनसा॥ न जातु दु:खं गणनीयम्न च निजसौख्यं मननीयम्कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ मनसा॥ दु:खसागरे... Continue Reading →

संस्कृत गीत (जीवन का गीत)

संस्कृत गीत का हिंदी में भाषांतर भी दिया हुआ है। गीत के रचनाकार स्व. पद्मश्री डॉ. श्रीधर भास्कर वर्णेकर जी है। गीत: मनसा सततं स्मरणीयम्वचसा सततं वदनीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ लोकहितं॥ न भोगभवने रमणीयम्न च सुखशयने शयनीयनम्अहर्निशं जागरणीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ मनसा॥ न जातु दु:खं गणनीयम्न च निजसौख्यं मननीयम्कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ मनसा॥ दु:खसागरे... Continue Reading →

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