गुरु के लिए नया नज़रिया दर्शाती हुई कविता! (दूसरा भाग)

गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं

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गुरु का महत्व- संस्कृत श्लोक (पहला भाग)

भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु (तीसरा भाग)

ગુરુ એ જ આધાર

प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा ।
शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥
भावार्थ :
प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध करानेवाले – ये सब गुरु समान है ।

मैंने इस स्तोत्र से प्रेरणा लेकर एक रचना लिखी है। रचना में मैंने कहा है कि हम कैसे अपने बुरे दौर में भी सकारात्मक और गतिशील रह सकते हैं और कुछ लोगों से मिले बुरे अनुभव को भी एक आकार दे सकते हैं। जैसे कि स्तोत्र में कहा है कि हर कोई गुरु समान है, जिससे हमने कुछ सीखा है।

रचना: नया नज़रिया!

मुझे रास्ते से भटकाने के लिए,
तुमने मेरा रास्ता, कांटों से भर दिया।
पर मैंने तो कांटों पर
चलना सीख लिया।

मुझे परेशान करने के लिए,
तुमने मेरे साथ, बुरा बर्ताव किया।
पर मैंने तो धैर्य और सहनशीलता का

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#संस्कृत #योग / SANSKRIT QUOTES WITH MEANING (3)

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योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः ।

Translation:
yogaścittavṛttinirodhaḥ ।

English Translation:
Yoga is restraining the mind-stuff (Chitta) from taking various forms (Vrittis).​

हिंदी अनुवाद:
चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है ।

source: resanskrit.com ( patanjali”s yoga sutra)

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#International Day of Yoga #संस्कृत मंत्र से, योग का महत्व

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पतंजलिप्रार्थना

योगेनचित्तस्यपदेनवाचां
मलंशरीरस्यचवैद्यकेन ।
योऽपाकरोत्तमंप्रवरंमुनीनां
पतञ्जलिंप्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥

हिंदी में अनुवाद:

मन की चित्त वृत्तियों को को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद द्वारा शुद्ध करने वाले मुनियों में सर्वश्रेष्ठ महर्षि पतंजलि को में दोनों हाथ जोड़कर नमन करता हूँ।

इस श्लोक को योगाभ्यास के शुरू में गाया जाता है।

‘योग’ शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जुड़ना या एकजुटहोना

आज योग का 6 वां अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहल की गई थी, यह दुनिया के लिए भारत की तरफ से उपहारहै इसलिए आज योग, सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि कई अलग अलग-अलग देशों में प्रसिद्ध हो चुका है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए श्री नरेंद्र मोदी के शब्द:

योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है; विचार और कार्य (क्रिया); संयम और पूर्णता…

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Book Review – Kaun he Ram!

मैं इस पोस्ट में "कौन हैं राम" किताब के बारे में साझा करना चाहुंगी। यह किताब के लेखक आशीष कुमार (ShankySalty) है।https://ashish05shanky.wordpress.com/ इस किताब में राम जी के बारे में सुंदर वर्णन है, जो काव्यात्मक ढंग से वार्तालाप जैसा है, जो इस किताब की सुंदरता को बढ़ा देता है। यह पुस्तक की विशेषताए साझा करना... Continue Reading →

मेरी माँ

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क्या कहूं मैं, कैसी है मेरी माँ?
सब से निराली है, मेरी माँ।

चेहरे पर हंसी, दिल में परोपकार का भाव
स्वभाव एसा कि हमेशा लोगों को ठंडक दे।

मेरी माँ निर्मल मन की मूरत है,
मेरी माँ निश्छल मन की मूरत है।

मुझ से ही उसकी पूरी दुनिया है,
मुझ से ही उसकी सारी खुशियां है।

शांत मिज़ाज की भी झलक मिलती है,
पर मेरे साथ बातूनी मिज़ाज भी रखती है।

ठहराव और गंभीर भी रहती है,
पर मेरे साथ शरारतें भी करती है।

मेरे लिए ममता से ओतप्रोत होकर,
रसोई भी पकाती है।

मेरे साथ प्यार से ओतप्रोत होकर,
घुमने भी आती है।

हर पल मेरे लिए आशीर्वाद बरसाती है,
हर पल मेरे लिए प्यार लुटाती है।

क्या कहूं मैं, कैसी है मेरी माँ?
सब से निराली है, मेरी माँ।

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