योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः । Translation:yogaścittavṛttinirodhaḥ । English Translation:Yoga is restraining the mind-stuff (Chitta) from taking various forms (Vrittis). हिंदी अनुवाद:चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है । source: resanskrit.com ( patanjali"s yoga sutra) Buy Now: Jivan Ke ShabdAmazon Link: Jivan Ke Shabd
कुछ बातें, यूँ ही..!(5) #सोच #फायदा
(1)श्रेष्ठ कार्य को करना है, एसा मत सोचिए। जो भी कार्य करेंगे, वो ही "श्रेष्ठ" तरीके से करना है, यह सोच रखिए। एसी सोच रखने का फायदा है। पहला फायदा: हम हर कार्य को सम्मान देंगे, तो हम सदा ही ज़मीन से जुड़े रहेंगे। दूसरा फायदा: हम सफलता प्राप्त करेंगे क्योंकि श्रेष्ठ तरीके से किये... Continue Reading →
तुम्हारा साथ
तुम्हारा साथ मतलब खूबसूरत पल। तुम्हारा साथ मतलबआज के लिए, बहुत सारी खुशियां,कल के लिए, बहुत सारी यादें। तुम्हारा साथ, मुझे उर्जा देता है,जैसे फूलों की सुगंध उर्जा देती है,जैसे सूर्य की किरण उर्जा देती है। तुम्हारा साथ, मुझे फिर से जीवंत बनाता है,जैसे एक संगीतकार को सुर जीवंत बनाता है,जैसे एक गीतकार को शब्द... Continue Reading →
🌼प्रभात प्रार्थना (1)🌼
हे परमेश्वर 🙏 आप से बस यही प्रार्थना है, हमारे भीतर, कुरूपी अज्ञान सेहम मुरझा गये हैं। आप की कृपा से,हमारे भीतर, ज्ञान रूपी,सुंदर पुष्प खिल उठे। आपकी कृपा से,हम सत्कर्म और भक्ति से,ज्ञान की महक फैलाते रहें।यह एक विचार, आंतरिक शक्ति का महत्त्व दर्शाता है, भीतर हैं हमारे प्राण, भीतर है हमारा केंद्र, भीतर... Continue Reading →
दृढ़ मनोबल
अगर…विश्वास की शम्मा जलाकर चलते हो,तो संशय से बुझने मत देना। अगर…रौशनी की उम्मीदें लेकर चलते हो,तो अंधेरे से डर मत जाना। अगर…कुछ कर गुज़रने की आग लेकर चलते हो,तो अवरोधों से डर मत जाना। अगर…जो चाहते हो, वो पाना चाहते हो,तो पीछे मत हट जाना। दृढ़ मनोबल से हीजीया जाता है जीवन। बुज़दिल होकर... Continue Reading →
मिलन की प्यास
प्यार के मिलन की राह में,तकती है ये आंखें। दो दिलों के मिलन की राह में,तकती है ये आंखें। मिलन हो,तो जैसे मंज़िल पाएं। मिलन हो,तो जैसे नया मंज़र पाएं। जो हम मिल जाएं,तो हम खिल जाएं। जो हम मिल जाएं,तो नया जहां बसाएं। अब बर्दाश्त नहीं दूरी,जब प्यास बढ़ी मिलन की। प्यार के मिलन... Continue Reading →
#पुस्तक अध्ययन #अज्ञान #आंतरिक विकास
"जितना हम किसी पुस्तक का अध्ययन करते हैं, उतना ही हमें अपने अज्ञान का आभास होता हैं।"- स्वामी विवेकानंद हमें अपने अज्ञान का आभास होते ही उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जो भी ज्ञान की बातें हो, उसे अमल में लाना चाहिए। यही आंतरिक विकास का मार्ग है। पढें हुए का अमल करने... Continue Reading →
विचारों को आत्मसात करना
"आपने जो भी पढ़ा है उसमें से यदि पाँच विचारों को भी अगर आत्मसात किया है और उससे अपना चरित्र निर्माण किया है, जीवन में उतारा है तो आपके पास किसी भी ऐसे व्यक्ति की तुलना में अधिक ज्ञान है, जिसने क्यों न पूरे पुस्तकालय का ज्ञान भी कंठस्थ कर लिया हो।"-स्वामी विवेकानंद
अभिव्यक्ति की कमी
मानसिक कुंठा का एक कारण ये भी है - अभिव्यक्ति की कमी। इसलिए, मैंने इस विषय पर एक कविता लिखने की कोशिश की है।अगर हमारी भावनाओं को पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं मिलती है, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। कुंठा, मानसिक तनाव और बीमारी से बचने के लिए अवश्य अपनी भावनाओं को... Continue Reading →
