दीपावली: छोटी सी संस्कृत प्रार्थना

प्रार्थना:-असतो मा सदगमय।तमसो मा ज्योतिर्गमय।मृत्योमामृतम् गमय।ॐ शांति शांति शांति।।अर्थात्हमको असत्य से सत्य की और ले चलो।अंधकार से प्रकाश की और ले चलो।मृत्यु से अमरता की

चिंता का पहाड

चिंता के विषय पर संस्कृत सुभाषित: चिता चिंता समानाडस्ति बिंदुमात्र विशेषत:।सजीवं दहते चिंता निर्जीवं दहते चिता।।अर्थात्चिता और चिंता समान कही गयी है पर उसमें सिर्फ

महा मृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ मंत्र का अर्थ:- ॐ- यह ईश्वर का वाचक है, परब्रह्म का प्रतिक है। हम त्रि- नेत्र

श्री हनुमत् पंचरत्नंस्त्रोत

(आदि शंकराचार्य द्बारा रचित- संस्कृत भाषा में) वीताखिल-विषयेच्छं जातानंदाश्र पुलकमत्यच्छम्। सीतापति दूताधं वातात्मजमध भावये हधम्।।१।। तरुणारूण मुख-कमलं करुणा-रसपूर पूरितापांगम्। संजीवनमाशासे मंजूल- महिमानमंजना भाग्यम्।।२।। शंबरवैरि- शरातिगमंबुजदल

द्बादशनाम स्त्रोत (संकटमोचनी स्तुति) (हनुमानजी की बहुत छोटी स्तुति)

हनुमानंजनीसूनुवायुपुत्रो महाबल:। रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोडमित विक्रम:।।१।। उदधिक्रमणश्चैव सीता शोक विनाशन:। लक्ष्मण प्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।२।। एवं द्वादशनामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:। स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य:

गणेश स्त्रोतम् (तृतीय भाग)

(आदि शंकराचार्य द्वारा रचित- संस्कृत भाषा में) अजं निर्विकल्पं निराकारमेकं निरानन्दमानन्द अद्वेतापूर्णम्। परं निर्गुणं निर्विशेषं निरीहं परब्रह्म रूपं गणेशं भजेम।। गुणातीतमानं चिदानन्दरूपम्चिदाभासकं सर्वगं ज्ञानगम्यम्।मुनिन्ध्येयमाकाशारूपं परेशंपरब्रह्म