एक पल

एक पल में ही जिंदगी बदलती है,
या तो जिंदगी सवरती है,
या तो जिंदगी सिखाती है।

एक पल में ही जिंदगी बदलती है,
या तो राहे मंजिल की और ले जाती है,
या तो राहे चौराहे पर ले आती है।

कुछ पाने के लिए एक ही पल होता है,
मेहनत में भले ही बरसों लगे हो।
कुछ खोने के लिए एक ही पल होता है,
सींचने में भले ही बरसों लगे हो।

बरसों से हुआ प्यासे को पानी,
एक ही पल में मिलता है।
बरसों से हुआ बेसहारा को सहारा,
एक ही पल में मिलता है।

पल-पल का खेल है निराला,
कभी जीत का पल,
दस्तक दे जाता है।
कभी हार का पल,
दस्तक दे जाता है।

हर पल नये पल के साथ नया बनना,
यही तो जिंदगी है।
हर पल नये पल के साथ आगे बढ़ना,
यही तो जिंदगी है।

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शिव मेरे शिव ( Audio with lyrics)

शिव मेरे शिव,
आप को सत् सत् वंदन।
आप ही भोलेनाथ और आप ही महादेव,
आप ही महाकाल और आप ही आदिदेव।

रूप अनेक है मेरे शिव के,
सौम्य रूप भी आपका,
रौद्र रूप भी आपका,
नटराज रूप भी आपका।

तीन है नेत्र शिव के,
भस्म है तन पे शिव के,
वस्त्र है बाघ खाल का तन पे शिव के,
सर्प है गले में शिव के।

रुद्राक्ष माला है जटाओं पर शिव के,
गंगा भी बहती जटाओं में शिव के,
चंन्द्र है मस्तक पर शिव के,
त्रिशूल और डमरू है कर में शिव के।

है देवता संहार के,
करते है मन के अंधकार का संहार।
जो जाए शरण में उनकी,
देते है रौशनी भक्ति की।

शिव मेरे शिव,
आपको सत् सत् वंदन।
आप ही नीलकंठ और आप ही गौरीशंकर,
आप ही रुद्रदेव और आप ही शंकर।

क्या फर्क पड़ता है?

 

मंजिल पाने का ठाना ही है,
तो मंजिल मुश्किल है या आसान,
क्या फर्क पड़ता है?

आसान है या मुश्किल है यह देखकर,
मंजिल को पाने का नहीं सोचा था।

मंजिल पाने का सोचा था
क्योंकी मूझे वो चाहिए,
मूझे वो पसंद है।
मेरे में जोश था, मेरे में जीगर था,
इसलिए मंजिल पाने का सोचा था।

तो अब वो जीगर, वो जोश,
मैं थोड़ी खोने दू?
आसान नहीं है तो क्या,
अब आसान बना देगे।

आधे रास्ते से पीछे मुड़ जाए
ऐसे कायर नहीं है,
आधा रास्ता काट लिया,
आधा पार कर लेंगे,
वैसे शैरदिल है।

रास्ते की परवाह तो
पहले भी नहीं की थी,
तो अब क्यों करें?

मंजिल पाने का ठाना ही है,
तो मंजिल मुश्किल है या आसान,
क्या फर्क पड़ता है?

घर

घर
क्या होता है ये घर?
घर है सूरज की रौशनी।
जैसे सूरज के बिना हमारी दुनिया नहीं चलती,
वैसे घर के बिना हमारी दुनिया नहीं चलती।

बंजारे से पूछो,
क्या है घर का महत्व?
फूटपाथ पे सोनेवाले गरीब से पूछो,
क्या है घर का महत्व?

घर तो जैसे,
धूप में छांव है।
डूबते को सहारा है।
मा की ममता है।

बड़ी खुशकिस्मत की बात है,
जिनका एक घर है।
चैन से बैठना, चैन से सोना,
चैन से सांस लेना, चैन से जीना।
कहां नसीब होता है ये सब,
घर के बिना?

घर अपनी सुंदर सी अलग दुनिया है।
जैसे हर चीज सजाते है घर में अपने,
वैसे हर सपना सजाते है घर में अपने।
कहां नसीब होता है ये सब,
घर के बिना?

પુષ્પની અભિલાષા (पुष्प की अभिलाषा)

બસ એ જ અભિલાષા.

જેમ પુષ્પને ખીલવાનું જ હોય,
એમ હુ પણ જીવનમાં અનેક અનુભવોથી ખીલતી રહુ.

જેમ પુષ્પ હસતું જ હોય છે,
એમ હુ પણ જીવનમાં હંમેશા હસતી જ રહુ.

જેમ પુષ્પમાં મુરજાઈને પણ ખીલવાની કળા હોય છે,
એમ હુ પણ જીવનનાં કપરા સંજોગો સામે લડીને ફરીથી વિજયી બની શકુ.

જેમ પુષ્પની સુગંધ સૌને મહેકાવી દે છે,
એમ મારા સ્વભાવની સુગંધથી દરેક જણ મહેકતું રહે.

બસ એ જ અભિલાષા.

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(हिन्दी भाषा में अनुवाद)

बस यही अभिलाषा।

जैसे पुष्प को बस खिलना ही है,
वैसे में भी जीवन के हर अनुभवों से खिलती रहु।

जैसे पुष्प को हसना ही है,
वैसे में भी हमेशा हसती रहु।

जैसे पुष्प में मुरझाकर भी खिलने की कला है,
वैसे में भी जीवन की कठीन परिस्थितियों से लडके फिर से विजयी बन सकु।

जैसे पुष्प की सुगंध सब को मेहकाती है,
वैसे मेरे स्वभाव की सुगंध से सब मेहकते रहे।

बस यही अभिलाषा।

आज का युग

पूर्व युग में भगवान को पूजते थे,
और आज के युग में पैसों को पूजते है।

द्वापर युग में तो कृष्ण की लीलाएं थी,
और कलयुग में पैसों की लीलाएं है।

कृष्ण की लीलाएं जैसे,
गोकुल में गायों को चराना,
गोपीयों के घर से माखन चुराकर खाना,
अधर्म जैसी सोच रखनेवाले कंसमामा को हराना,
द्रोपदी के चीर पूरना।

और पैसों की लीलाएं जैसे,
प्रदूषण बढ़ाकर गायों को प्लास्टिक जैसे तत्व खिलाना,
एक भाई दूसरे भाईको भी माखन नहीं देता,
धर्म जैसी सोच रखनेवाले को हराना,
उच्च विचार रखने वाले को राजनिति खेलके गिराना,
बहन-बेटियों के सम्मान को प्रश्रनार्थ चिन्ह लगाना?

पूर्व युग में भगवान ही सर्वस्व थे,
आज के युग में पैसा ही सर्वस्व है।

तु तो गलत नहीं।

कुछ राहो की मंजिल ही नहीं होती,
तो तु तो गलत नहीं है।
चला जा अब दूसरी राहो पे,
रुक मत, चल दे।

कुछ संबंधो की तकदीर ही नहीं होती,
तो तु तो गलत नहीं है।
चला जा अब दूसरे नये संबंधो की और,
रूक मत, चल दे।

कुछ रास्ते होते ही है गिरने के लिए,
तो तु तो गलत नहीं है।
उठ जा अब तु इस रास्ते से,
रूक मत, चल दे।

कुछ लोग होते ही हैं सबको तड़पाने के लिए,
तो तु तो गलत नहीं है।
छोड दे मन से दामन उन लोगों का,
रुक मत, चल दे।

एक प्यारा घर [Poem in Hindi Language]

बनके तितली उड़ गई मैं,
ये जहांसे उड़ गई मैं।
उड़ते उड़ते चली गई कही दूर मैं,
दूसरे जहांमें पहुंच गई मैं।

वहा एक प्यारासा घर मिला मूझे,
और प्यारेसे लोग मिले।
सबके दिलोंमें ना दिवारे थी, ना दुरियां थी,
दिया जलता था तो बस प्यारकी ज्योतका।

मेघधनुषके रंगो जैसी, रंगीन दुनिया मिली
एक रंग मिला मूझे खुशी का,
उस रंग मे रंग गई मैं,
और खुशीया पा गई मैं।
इस खुशी में मेहक उठी मैं,
इस प्यारे से घर मे जीने लगी मैं।

मेघधनुषके रंगो जैसी, रंगीन दुनिया मिली
दूसरा रंग मिला मूझे रौशनी का,
सजा हुआ था घर एक सुंदर तोरण से।
तोरण बना था एक-दूसरे के अरमानों से,
इस रौशनी में चमक उठी मैं,
इस प्यारे से घर मे जीने लगी मैं।

भाई-बहनका रिश्ता

बांधती है राखी बहन अपने भाईको,
राखी तो एक बहाना है प्यार जतानेका,
भाई-बहनका रिश्ता ही है अनोखा!

अगर एक- दूसरेकी खिचातानी है,
तो भी दिल में प्यार ही है!
अगर एक- दूसरे से दूर रहते है,
तो भी दिल से पास ही है!
अगर एक-दूसरे से लडाई है,
तो भी दिल में प्यार ही है!

एक एसा रिश्ता है ये,
जिसमें एक-दूसरे से दोस्ती है,
जिसमें एक-दूसरे के राझ छिपे है,
जिसमें हरदम साथ छिपा है,
जिसमें छांव है, हूंफ है!

बांधवाता है राखी भाई अपनी बहनसे,
राखी तो एक बहाना है प्यार जतानेका,
भाई-बहनका रिश्ता ही है अनोखा!

इश्क

जो रुहको रुहसे मिला दें,
वो ही तो इश्क है!

जो मूझे तेरी परछाई बना दें,
वो ही तो इश्क है!

दिल है मेरा, पर धड़कन है तूझसे,
वो ही तो इश्क है!

हंसी है तेरी, पर खिल उठती हूं मैं,
वो ही तो इश्क है!

तेरे होने से ही, मिट जाते हैं दर्द मेरे,
वो ही तो इश्क है!

तूझे सोचने से ही, मेहक उठती हूं मैं,
वो ही तो इश्क है!