तराशना चाहती हू कुछ

तराशना चाहती हू कुछ,निखारना चाहती हू कुछ। मैं ढूंढ रही हू,मेरी आवाज़…!जो अमानवीयता देखकर,मौन ही हो गई। मैं ढूंढ रही हू,मेरी द्रढता…!जो कार्यो को पूजा

स्त्री

एक स्त्री,खुशी का धागा लेकर,अपनी मुस्कान का मोती पिरोती है।मुस्कान का मोती लेकर,अपनी चुलबुलाहट पिरोती है। एक स्त्री,आत्मविश्वास का धागा लेकर,अपनी इच्छाओं के मोती पिरोती

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