दुर्गा माता के नव स्वरूप ( चौथा स्वरूप)

हम “कूष्माण्डा” शब्द की संधि विच्छेद करेंगे,“कू” का अर्थ है “कुछ”, “उष्मा” का अर्थ है “ताप” और “अंडा” का अर्थ है “ब्रह्मांड”, मतलब थोड़ी ही

दुर्गा माता के नव स्वरूप (तीसरा स्वरूप) (सुंदरता और निर्भयता का स्वरूप)

दुर्गा माता का यह स्वरूप सुंदरता का स्वरूप और निर्भयता का स्वरूप है। माता के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है, इसलिए

दुर्गा माता के नव स्वरूप ( पहला स्वरूप)

शैल का अर्थ पर्वत, हिमालय पर्वत की पुत्री यानी देवी पार्वती, शैलपुत्री कहलाती है। दुर्गा माता के पहले स्वरूप ने पहाड़ से जन्म लिया है। पहले

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