वाणी पर संयम #लघुकाव्य-5

कड़वे बोल न चुने,मीठे बोल चुने।मिठास को बढ़ाए,रिश्तों को निभाए।मन में कड़वाहट न रखें,मन में बड़प्पन रखें।जीवन निखर जाएगा,रिश्ता संवर जाएगा,वाणी पर संयम से। My Book Now Available on Amazon Kindle अन्य ब्लॉग:बारिश की बूंदें શબ્દોની કમાલ / शब्दों की कमाल કવિતા નું સૌંદર્ય/ कविता का सौंदर्य लघुकाव्य-1 રાખ થઈ જાય સંબંધો / राख हो जाए... Continue Reading →

दीपावली की शुभकामनाएं #संस्कृत प्रार्थना

Harina's Blog

प्रार्थना:-
असतो मा सदगमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योमामृतम् गमय।
ॐ शांति शांति शांति।।
अर्थात्
हमको असत्य से सत्य की और ले चलों।
अंधकार से प्रकाश की और ले चलों।
मृत्यु से अमरता की और ले चलों।
ॐ शांति शांति शांति।।

दीपावली मतलब प्रकाश का पर्व, हम यह प्रार्थना करके अपने अंदर ज्योति प्रगटाए और सिर्फ बहार ही प्रकाश का अनुभव न करकर, अपने भीतर भी प्रकाश महसूस करें।

जैसे ज्योत से ज्योत जलाते हैं,
वैसे ही हम, दूसरो की खुशी का कारण बनें,
हम दूसरो की परेशानी का कारण न बनें,
हम खुश रहे और दूसरो को भी खुश रखें,
हम शांति से रहें और दूसरों को भी शांति से रहने दे

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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सपने से अर्थ पाने का सफर

सपने तू देख और पूरे कर। तुझे सपनों से अपने जीवन में मकसद मिलेगा। मकसद पर चलकर,अपने जीवन का नया अर्थ मिलेगा। हो गया ना, सपने से अर्थ पाने का सफर! मेरी पहली किताब Buy Now: Jivan Ke ShabdAmazon Link: Jivan Ke Shabd

उपनिषद वचन

“अन्नं ब्रह्म।” यह वचन उपनिषद में है, जिसका सीधा सीधा शाब्दिक अनुवाद करें तो एसा होगा कि भोजन ब्रह्म है। [अंग्रेजी में फुड इज गोड( Food is God)] पर इतने महत वचनों के सीधे सीधे शाब्दिक अनुवाद नहीं होते, एसे वचनों को समझना पड़ता है, गहराई के भाव को जानना पड़ता है। “अन्नं ब्रह्म” का... Continue Reading →

#QUOTE #ESTUARY #EPITOME OF LOVE

The estuary is an epitome of true love. The river flows towards the ocean like the way love should flow towards our loved-ones with devotion and selflessness.Harina EPITOME #QUOTE #SIMILARITIES #DIFFERENCES स्वयं अपना नेतृत्व करें (BE YOUR OWN LEADER ) मेरी पहली किताब Buy Now: Jivan Ke ShabdAmazon Link: Jivan Ke Shabd

संस्कृत गीत (जीवन का गीत)

संस्कृत गीत का हिंदी में भाषांतर भी दिया हुआ है। गीत के रचनाकार स्व. पद्मश्री डॉ. श्रीधर भास्कर वर्णेकर जी है। गीत: मनसा सततं स्मरणीयम्वचसा सततं वदनीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ लोकहितं॥ न भोगभवने रमणीयम्न च सुखशयने शयनीयनम्अहर्निशं जागरणीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ मनसा॥ न जातु दु:खं गणनीयम्न च निजसौख्यं मननीयम्कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्लोकहितं मम करणीयम् ॥ मनसा॥ दु:खसागरे... Continue Reading →

मेरी पहली किताब

मैं आप सभी के साथ मेरा पहला कविता संग्रह "जीवन के शब्द" के बारे में साझा करना चाहती हूँ। मैंने इस कविता संग्रह में ज़िंदगी के विभिन्न पहलुओं को सुंदर शब्दों में पिरोया है। रोज़-बरोज की ज़िंदगी में जो मुश्किलें आती हैं रिश्तों में, सपनों को पाने के लिए, हमारे कार्य क्षेत्र में, उनका समाधान... Continue Reading →

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