सही-गलत की उलझनें

मैंने कविता में “सही-गलत की उलझनों” पर प्रकाश डाला है।

कुछ लोग “अनुभवी” होने का गुरुर करते हैं और दूसरों को अपने मुताबिक खिलने का मौका नहीं देते, अपने ही अनुभवों को महान मानकर, दूसरों को उसी तरह ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर करते हैं।

मैं यही संदेश देना चाहूंगी कि किसी के कहने से, कुछ सही या गलत नहीं होता है, सबका अलग अलग नज़रिया होता है, उसी हिसाब से सबकी सही-गलत की परख अलग-अलग होती है, एक ही चीज किसी एक इंसान के लिए सही हो सकती है और दूसरे इंसान के लिए गलत हो सकती है। किसी के बहकावे में न आकर, खुद अपने विचार व्यक्त करने चाहिए।

मैंने इसी विषय पर अपने विचार प्रर्दशित किये है।

कविता:-

क्यों दूसरों को उलझाते हो
सही-गलत की परिभाषाओं में?
क्यों दूसरों को ढूंढने नहीं देते हो
सही गलत की परिभाषाओं को?

तुम्हारा जो सही है,
तुमने खुद अनुभव किया है;
तुम्हारा जो गलत है,
तुमने खुद अनुभव किया है;
तो फिर दूसरों को,
क्यों वंचित रखते हो वो अनुभवों से?

तुम्हारा जो सही है,
उस रास्ते पर सब चले;
क्यों एसी अपेक्षा रखते हो?
सबकी अलग-अलग यात्रा होती है,
दूसरों को अपना रास्ता खुद ढूंढने दो,
दूसरों को अपना सही खुद ढूंढने दो।

खुद के सही-गलत में,
दूसरों को मत उलझाओ।
अपना-अपना सही-गलत,
सबको खुद चुनने दो।

सही-गलत के बारे में सदगुरु के विचार:-

आप अपने भीतर छोटी छोटी चीज़ के बारे में इतना संघर्ष पैदा कर लेते है कि कहीं आपसे कुछ गलत न हो जाय। आप यह 100% नहीं जानते कि आप जो भी कर रहे है वह सही होगा। आपके लिए बस यह महत्वपूर्ण होना चाहिए जो कुछ भी आप कर रहे है वह आपको और आपके आसपास लोगों को खुशियां देगा। उस काम में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दीजिये।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव

14 comments

  1. बहुत शानदार कविता लिखी आपने
    मस्त अद्भूत आनन्द आ गया

    लिखना कला कहते सब
    हम ना माने कला इसे
    हम कहते हैं जज्बात निकलते
    कलम सहारे निकले यहाँ।।

    आपके जज्बात बहुत बेहतर
    अनुभव वक़्त सिखाए सदा
    आप अनुभवी हमसे बहुत
    बहुत सीखना हमे यहाँ।।

    Liked by 3 people

    1. तहे दिल से आपका शुक्रिया कविता पसंद करने के लिए☺️☺️सराहना करने के लिए बहुत ही आभार😊🙏🙏

      Liked by 2 people

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