मैं छांव बन जाउंगी (लड़की लड़के को जवाब दे रही है)

क्या मेरा साथ दोगी? (लड़का लड़की से पूछ रहा है)

तेरे एक ही लफ़्ज़ से,
समझ लूंगी, तेरे हर लफ़्ज़ों को।
तेरे हर दुःख की धूप में,
मैं छांव बन जाउंगी।

तेरे नयनों से ही,
पढ़ लूंगी, तेरा मन।
तेरे हर दुःख की धुप में,
मैं छांव बन जाउंगी।

तेरे इशारों से ही,
समझ लूंगी, तेरे जज़्बात।
तेरे हर दुःख की धुप में,
मैं छांव बन जाउंगी।

हा… तुम्हारी ज़िंदगी में आकर,
तुम्हारा साथ देना चाहूंगी।
हा… मैं भी वादा करुंगी,
हर दम तुम्हारा साथ दूंगी।

12 comments

  1. एक हम भी जवाब देते हैं लड़की की तरफ से अभी आधी कविता है। अभी अभी लिखा है—

    जिंदगी है तूँ मेरी,इतना भी ना समझ पाए,
    फिर लफ्जों से बयान क्या करना,
    जब आँखों में देख ना पाए समर्पण मेरे,
    फिर वादों का ऐतबार क्या करना।
    तुम वृक्ष हो मैं छाया,मैं मय तुम प्याला,
    तुम मिट गए तो हम बिखर जाएंगे,
    तुझे खोना तो दूर,तुम रूठे तो मर जाएंगे,
    अरे तेरी अहमियत कितना जीवन में,
    अबतक समझ न पाए,फिर बयान क्या करना,
    जब आँखों में देख ना पाए समर्पण मेरे,
    फिर वादों का ऐतबार क्या करना।

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    1. बेहद खूबसूरत 👌👌 आप पूरी कविता बना ही देना, बाकी की पंक्तियों की प्रतीक्षा रहेगी ☺️

      Liked by 1 person

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