कुदरत का क्रम

बसंत ऋतु है तो पतझड़ भी तो है,
बेवजह तो नहीं है,
यह कुदरत का क्रम है।

तेरी अगर बनती है,
तो बिगड़ेगी भी।
तो फिर क्यों निराश है?
यह कुदरत का क्रम है।

तुझे गिरने के बाद बस उठना है,
उठने के बाद फिर से प्रयत्न करना है,
फिर से तेरी प्रगति होगी।
यह कुदरत का क्रम है।

बसंत ऋतु है तो पतझड़ भी तो है,
बेवजह तो नहीं है,
यह कुदरत का क्रम है।

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