खुद का साथ

कोई मुझे समझे या न समझे,
मैं खुद को समझती हूँ,
वो ही बहुत है।

कोई मेरे विचारों को महत्व दे या न दे,
मैं खुद महत्व देती हूँ,
वो ही बहुत है।

कोई मेरे फैसलों का समर्थन दे या न दे,
मैं खुद समर्थन देती हूँ,
वो ही बहुत है।

मेरा जीवन है,
तो मुझे ही संभालना है,
मेरे जीवन को मुझे ही चलाना है।

अकेले आये थे, अकेले जाना है,
बीच में कोई साथ अच्छा हो या न हो,
तो भी जीवन रुकता नहीं है।

गर कोई, कुछ वक्त साथ दे या न दे,
मैं खुद के साथ हूँ,
वो ही बहुत है।

अपने बलबूते पर ही
अपना जीवन टिकता है।
अपने बलबूते पर ही
अपना जीवन चलता है।

12 comments

  1. सुन्दर लेखन | याद आगया वो बहु चर्चित शेर :
    खुदी को कर बुलंद इतना….. 

    बलबूता तो अपना ही चाहिये 
    कोई दो शब्द उत्साह बढ़ाने के कह दे 
    वो ही बहुत है ! 🙂😊

    Liked by 2 people

  2. “कोई मुझे समझे या न समझे,
    मैं खुद को समझती हूँ,
    वो ही बहुत है।”

    Jeevan ko dekhne ka aapka tarika behad sanjeeda hai. Bahut keemti lesson de rhi h aap. Aapke poems me aapke finest morals dekhne ko milta h.

    Keep it up👍

    🌟🌟🌟🌟🌟

    Liked by 2 people

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