दिल की दास्तां

दिल की दास्तां,
जब सुनाने बैठे उनको,
तब वक्त गुजरता गया,
पर बातें न रूकी।

दबे हुए थे सारे जज़्बात,
मेरे दिल में।
दबे हुए थे सारे दर्द,
मेरे दिल में।
बैचेन दिल बस,
सुकून की तलाश में।

सारे अरमां, जो बयां हुए,
बस उनसे।
सारे जज़्बात, जो बयां हुए,
बस उनसे।
तब जाकर सुकून पाया,
मेरे इस दिल ने।

दिल की दास्तां,
जब सुनाने बैठे उनको,
तब वक्त गुजरता गया,
पर बातें न रूकी।

6 comments

  1. ”दिल की दास्तां,
    जब सुनाने बैठे उनको,
    तब वक्त गुजरता गया,
    पर बातें न रूकी।”

    Lajawab✨✨✨✨✨

    Waqt gujarta gya shabd me
    Mann ki ufaan hai…

    Ki saath baithey, samay kab, kaise nikal gya…pata he nhi chala…

    ……dil khush gya 🌟🌟🌟🌟🌟

    Liked by 2 people

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s