दो चेहरे

चेहरे के पीछे चेहरा,
एक ही व्यक्ति के दो चेहरे।

जो उसकी तारीफें करता फिरे,
उसके साथ अच्छा वाला चेहरा।

वाहवाही लुटने का मज़ा,
जो आता है उसे।

जो उसकी तारीफें ना करे,
उसके साथ अलग चेहरा।

जो उसकी जी-हज़ूरी करता फिरे,
उसके साथ अच्छा वाला चेहरा।

अहंकार से भरा हुआ,
है जो उसका मन।

जो उसकी जी-हज़ूरी ना करे,
उसके साथ अलग चेहरा।

जो लोग स्वार्थ रखते हैं,
वो लोग चेहरे बदलते हैं।

चेहरे के पीछे चेहरा,
एक ही व्यक्ति के दो चेहरे।

7 thoughts on “दो चेहरे

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  1. Dhoop-chaav
    Din-raat
    Roshni-andhera
    Kaala-safed
    Achha-bura…

    Sub he hai dou-pehlou…

    Aapki Kavita me aapki utkrist soch ka parichay mila…
    Behad achha laga.

    Aage bhi is tarah ke, ucchtam-shreni ke kaavya dete rahiey.

    👍

    Liked by 2 people

    1. बिलकुल सही कहा आपने। हर बात के दो पहलू होते ही हैं। सराहना के लिए तहेदिल से शुक्रिया, बहुत ही खुशी मिली मुझे कि आपको यह कविता पसंद आई।☺️☺️🙏

      Liked by 1 person

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