अनकही बातों की घुटन

अनकही बातों को
सिने से लगा के
रखने से एक
अजब सी घुटन
महसूस होती थी।

पर जब…
अनकही बातों को
लिखकर व्यक्त
करना शुरू किया
तब एक
अजीब सा सुकून पाया।

बंजर हो चुके,
मन ने हरियाली पा ली।

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हमारे जीवन में कई घटनाएं एसी होती हैं जो भावनाओ पर असर हो जाती हैं, हम मन ही मन घुटन महसूस करते है, किसी से बयां नहीं कर सकते, पर एसा करने से हमे ही तकलीफ होती है, इसलिए एसी बातों को किसी करीबी से साझा किजीए या तो कोई कला के माध्यम से अभिव्यक्त कर सकते है, चित्रकला, गायन, वादन, नृत्य कला, लेखन कला इत्यादि।

दिल के ज़ख्मों को दबाकर रखने से, वो घाव और गहरे हो जाएंगे पर अभिव्यक्त करने से वो घाव भर जाएंगेे।

11 comments

  1. जब एहसासों का शैलाब है उमड़ता,
    मैं अक़्सर जज़बातों में बह जाता हूं,
    आदत नहीं कहने की किसी से, बयां करूँ कैसे,
    मन में जो भी आता है, लिख कर रह जाता हूँ।

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    1. खूब कहा। यही रचना थी, जो आपकी रचना से मिलती जुलती है। यह मेसेज आपका spam में चला गया था, अब मिला मूझे।

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  2. और ऐसी परिस्थिति हर किसी के सामने कभी न कभी आती ही है
    इसीलिए कहा भी गया है

    वियोगी होगा पहला कवि
    आह से उपजा होगा गान
    निकल आंखों से चुपचाप
    बही होगी कविता अंजान

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