किसीको इतना भी छांव मत दिजिए,
कि वो धूपका सामना ही ना कर पाए।

किसीको इतना भी अनसुना मत किजिए,
कि वो बोलना ही भूल जाए।

किसीको इतना भी अकेला मत छोड़िए,
कि वो भीड़का सामना ही ना कर पाए।

किसीको इतना भी मत डराइए,
कि वो अपने-आपसे भी डरने लगे।

किसीको इतना भी प्यार मत दिजीए,
कि वो प्यार से ही भागने लगे।

अपने ही मन की करने में,
दूसरे की हंसी ना छिन जाए,
वो ध्यान जरूर रखना चाहिए।

अपने ही मन की करने में,
दूसरे की आवाज ना दब जाए,
वो ध्यान जरूर रखना चाहिए।

वो ध्यान रखने के लिए अपने-आप से उपर उठकर दूसरों की परिस्थितियों को समझने का दृष्टिकोण रखना चाहिए।
मेरी इच्छा, तेरी इच्छा से हमारी इच्छा होती है तो ये नौबत ही नहीं आती है।

हर एक को अपना वजूद होता ही है। हर एक व्यक्ति, जिसका जन्म हुआ है इस दुनिया में, सबकी एक पहचान होती है। सबके विचारों को सम्मान देना चाहिए। कुछ लोगों को लगता है कि सिर्फ और सिर्फ उनके पास ही ज्यादा ज्ञान है। उन सबको मेरा निवेदन है कि आप के पास ज्यादा ज्ञान है तो उसकी सिर्फ बडाईया हांकने से बेहतर है कि आप आपका ज्ञान बांटिए। बांटने से ज्ञान बढ़ता है। पर कम-से-कम लोगों को नीचा न आंके।

हर एक को अपने विचारों को प्रगट करने का अवकाश मिलना चाहिए। अपनी आवाज से अपनी बात रखने का अवकाश मिलना चाहिए। ना कि आप, अपने आप को सबकुछ समझ कर, दूसरों की आवाज और हंसी छिनते रहे।

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I am Harina Pandya, with a bundle of enthusiasm, positive thinking and creativity. I am a poet and a blogger. I am passionate about writing since childhood, expressing myself through writing in three different languages namely Gujarati, Hindi and English. I love to share on different topics in a poetry form, article form and as an illustrator form as well.

3 Comment on “अति का अंत

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